Vrishabha Sankranti: पुण्य फल अर्जित करना है तो वृषभ सक्रांति को करें पूजा, जप और दान, जानें कब है संक्रांति

Vrishabha Sankranti 2021: वृषभ संक्रांति (Vrishabha Sankranti) के दिन पूजा (Worship), जप, तपस्या और दान करने से अपार पुण्य फल की प्राप्ति होती है। इस महीने में, किसी प्यासे व्यक्ति को पानी पिलाने या घर के बाहर प्याऊ लगाने से, व्यक्ति को यज्ञ करने के बराबर पुण्य फल की प्राप्ति होती है।

Vrishabha Sankranti:  पुण्य फल अर्जित करना है तो वृषभ सक्रांति को करें पूजा, जप और दान, जानें कब है संक्रांति

Vrishabha Sankranti 2021:  शुक्रवार 14 मई को वृषभ संक्रांति (Vrishabha Sankranti) त्योहार मनाया जाएगा। शास्त्रों में वृषभ संक्रांति (Vrishabha Sankranti) को मकर संक्रांति के समान माना जाता है। इस दिन पूजा, जप, तप और दान का विशेष महत्व बताया गया है। शास्त्रों के अनुसार, संक्रांति के दिन किसी पवित्र नदी या कुंड में स्नान करने से तीर्थ के समान फल मिलता है। आइए जानते हैं वृषभ संक्रांति (Vrishabha Sankranti) के महत्व के बारे में। वृषभ संक्रांति (Vrishabha Sankranti) के दिन पूजा (Worship), जप, तपस्या और दान करने से अपार पुण्य फल की प्राप्ति होती है। इस महीने में, किसी प्यासे व्यक्ति को पानी पिलाने या घर के बाहर प्याऊ लगाने से, व्यक्ति को यज्ञ करने के बराबर पुण्य फल की प्राप्ति होती है।

सूर्य देव वृषभ राशि में प्रवेश करेंगे

वृषभ संक्रांति (Vrishabha Sankranti) पर सभी ग्रहों में प्रधान कहे जाने वाले सूर्य देव 14 मई को मेष राशि से वृषभ राशि में प्रवेश करेंगे। इस राशि में सूर्य देव 15 जून 2021 तक बैठे रहेंगे। ज्योतिष शास्त्र में सूर्य देव को आत्मा, मान, प्रतिष्ठा आदि का कारक माना गया है।

वृषभ संक्रांति क्या है?

ज्योतिष शास्त्र के अनुसार, सूर्य देव एक महीने में एक राशि से दूसरी राशि में गोचर करते हैं। जब सूर्य देव एक राशि से दूसरी राशि में गोचर करते हैं, तो इसे संक्रांति कहा जाता है। जब सूर्य देव मेष राशि (Aries) से अपनी उच्च राशि में प्रवेश करते हैं, तो इसे वृषभ संक्रांति कहा जाता है। सूर्य के इस राशि परिवर्तन के कारण मौसम में भी बदलाव देखा जा सकता है।

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वृषभ संक्रांति (Vrishabha Sankranti) का महत्व

शास्त्रों के अनुसार, वृषभ संक्रांति (Vrishabha Sankranti) के दिन पूजा, जप, तपस्या और दान का फल कई गुना अधिक होता है। इस महीने में, किसी प्यासे व्यक्ति को पानी देने या घर के बाहर प्याऊ लगाने से, व्यक्ति को यज्ञ करने के बराबर मिलता है। इस दिन व्यक्ति को ओम नमो भगवते वासुदेवाय मंत्र की एक माला जप करना चाहिए।