गुलाम और आनंद के खिलाफ कार्यवाही कर दस जनपथ बागियों को बनाएगी 'शहीद'!

बताया जा रहा है कि पार्टी इन असंतुष्ट नेताओं को जवाब देने के लिए भी तैयार हो गई है, पार्टी इसके लिए जम्मू की बैठक और प्रधानमंत्री मोदी के सम्मान में गुलाम नबी आजाद के बयान को आधार बनाया जा सकता है।

गुलाम और आनंद के खिलाफ कार्यवाही कर दस जनपथ बागियों को बनाएगी 'शहीद'!

नई दिल्ली। कांग्रेस में जी- 23 नेताओं के नेताओं के बागी रवैये के बाद पार्टी की अंदरूनी कलह सामने आ गई है। कांग्रेस के बागी नेताओं की बयानबाजी से आजिज अब कांग्रेस आलाकमान इन नेताओं का मामला अनुशासनात्मक समिति को भेजने पर विचार कर रहा है, ताकि बागियों को मजबूत संदेश दिया जा सके। हालांकि गांधी परिवार की करीब धड़ा बागी नेताओं के खिलाफ कार्यवाही करने की मांग कर रहा है। वहीं अब सवाल ये उठता है कि कांग्रेस पार्टी के भीतर लोकतंत्र की मांग करे वाले इस गुट के नेताओं के खिलाफ कार्यवाही कर क्या कांग्रेस आलाकमान बागियों को शहीद करने जैसा कदम उठाएगा। हालांकि इसकी उम्मीद कम ही है।

बताया जा रहा है कि पार्टी इन असंतुष्ट नेताओं को जवाब देने के लिए भी तैयार हो गई है, पार्टी इसके लिए जम्मू की बैठक और प्रधानमंत्री मोदी के सम्मान में गुलाम नबी आजाद के बयान को आधार बनाया जा सकता है।

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वहीं कांग्रेस में गांधी परिवार समर्थक गुट दूसरी रणनीति पर काम कर रहा है। इसके तहत  जिस शहर में समूह 23 के नेता कार्यक्रम करेंगे, उस शहर में कांग्रेस के द्वारा उनका विरोध किया जाएगा। गौरतलब है कि कांग्रेस में बवाल मचा हुआ है और कभी गांधी परिवार के करीबी रहे आनंद शर्मा के ट्वीट को लेकर तारिक अनवर, जितिन प्रसाद, अधीर रंजन चौधरी, जितेंद्र सिंह जैसे तमाम नेता नाराज हैं।

असल में शर्मा ने बंगाल में वाम दलों के साथ आईएसएफ के गठबंधन की कड़ी आलोचना की और इसे पार्टी की सोच के खिलाफ गठबंधन करार दिया। तारिक अनवर ने कहा कि आनंद शर्मा को पार्टी के अंदर अपनी बात रखनी चाहिए थी न कि सोशल मीडिया पर।

बागी गुट के नेताओं ने शर्मा से शुरू कर दी दूरी

वहीं अधीर ने सीधे हमला करते हुए कहा कि आनंद शर्मा किसी की मदद करने के लिए ऐसा बयान दे रहे हैं। अधीर ने कहा कि वह बीजेपी की मदद करना चाह रहे हैं। वहीं पार्टी महासचिव प्रियंका गांधी ने स्पष्ट संकेत दिया कि बंगाल राज्य अध्यक्ष अधीर रंजन के चुनावी गठबंधन का फैसले से आलाकमान को कोई दिक्कत नहीं है। फिलहाल बताया जा रहा है कि जितिन प्रसाद, वीरप्पा मोइली, मनीष तिवारी जैसे कई नेता, जिन्होंने पिछले साल सोनिया गांधी को लिखे पत्र पर हस्ताक्षर किए वह भी अब शर्मा के बयान पर उनसे दूरी बनाने लगे हैं।