रालोसपा का जदयू में विलय आज: कार्यकर्ता पहुंचे राजद, खाली हुई पार्टी तो गुरु की शरण पहुंचे उपेन्द्र

जेडीयू की सदस्यता लेने से पहले उपेन्द्र कुशवाहा आरएलएसपी की आखिरी बैठक करेंगे और इसके बाद दोपहर एक बजे होने वाली बैठक में कुशवाहा आधिकारिक तौर पर जेडीयू के साथ आरएलएसपी के विलय की घोषणा करेंगे।

रालोसपा का जदयू में विलय आज: कार्यकर्ता पहुंचे राजद, खाली हुई पार्टी तो गुरु की शरण पहुंचे उपेन्द्र

पटना। राज्य के राजनीतिक गलियारों में लंबे समय से चली आ रही अटकलों पर आखिरकार आज विराम लग जाएगा। कभी नीतीश कुमार के शिष्य रहे रालोसपा अध्यक्ष उपेन्द्र कुशवाहा जदयू में शामिल होंगे। हालांकि रालोसपा में पहले ही फूट हो चुकी है और पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष समेत कई नेता राजद में शामिल हो चुके हैं। जानकारी के अनुसार, मुख्यमंत्री नीतीश कुमार, जेडीयू सुप्रीमो आरसीपी सिंह सहित जेडीयू के सभी दिग्गजों की मौजूदगी में उपेन्द्र कुशवाहा पार्टी में शामिल होंगे। उनके जेडीयू में शामिल होने से पार्टी का जेडीयू में विलय हो जाएगा।

फिर पहुंचे नीतीश कुमार के दरवाजे

जेडीयू की सदस्यता लेने से पहले उपेन्द्र कुशवाहा आरएलएसपी की आखिरी बैठक करेंगे और इसके बाद दोपहर एक बजे होने वाली बैठक में कुशवाहा आधिकारिक तौर पर जेडीयू के साथ आरएलएसपी के विलय की घोषणा करेंगे। आपको बता दें कि यह पहली बार नहीं है, इससे पहले भी उपेंद्र कुशवाहा की राष्ट्रीय समता पार्टी का जदयू में विलय हो चुका है।


असल में 2000 में कुशवाहा ने अपनी चुनावी राजनीति की शुरुआत की। हालाँकि, 2007 में उन्हें जनता दल (यूनाइटेड) से बर्खास्त कर दिया गया था। इसके बाद, फरवरी 2009 में राष्ट्रीय जनता पार्टी की स्थापना कुशवाहा ने की थी। लेकिन, नवंबर 2009 में, पार्टी का जनता दल (यूनाइटेड) में विलय हो गया था।

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लोकसभा चुनाव 2013 से पहले दिया जेडीयू से इस्तीफा

असल में 2014 में हुए लोकसभा चुनाव से पहले उपेंद्र कुशवाहा ने जदयू से इस्तीफा दिया और उस वक्त वह तब राज्यसभा सदस्य थे। उन्होंने आरोप लगाया कि नीतीश मॉडल विफल हो गया है और कानून-व्यवस्था की स्थिति खराब हो रही है। इसके बाद उन्होंने राष्ट्रीय लोक समता पार्टी की स्थापना की और पटना के गांधी मैदान में एक रैली में अपनी पार्टी के नाम और झंडे का अनावरण किया। लेकिन अब राजनीतिक समीकरणों के चलते एक बार फिर उनकी पार्टी जदयू के साथ विलय के कगार पर है।