येदियुरप्पा सरकार पर आरक्षण संकट, लिंगायत बढ़ाएंगे मुश्किल

कर्नाटक में आरक्षण को लेकर सियासत गर्म है और पंचमाली लिंगायत, कुरुबा और वाल्मीकि समुदाय आरक्षण की समीक्षा की मांग कर रहे हैं वहीं पंचमाली समुदाय 2 ए श्रेणी का दर्जा देने की मांग कर रहा है।

येदियुरप्पा सरकार पर आरक्षण संकट, लिंगायत बढ़ाएंगे मुश्किल

बेंगलूरू। कर्नाटक में राज्य की येदियुरप्पा सरकार फिलहाल आरक्षण को लेकर मुश्किल में है। क्योंकि राज्य के कई समुदाय राज्य में उनका आरक्षण कोटा बढ़ाने की मांग कर रहे हैं। राज्य के पंचमसाली लिंगायत समुदाय (Panchamasali Lingayat community) के लोग कर्नाटक (Karnataka) की राजधानी बेंगलुरु में रविवार को एक रैली (रैली) का आयोजन कर रहे हैं। हालांकि इससे पहले समुदाय के लोगों ने 450 किलोमीटर की पदयात्रा की है और इसका समापन आज (21 फरवरी) को बैंगलोर रैली में होगा। लिंगायत समुदाय के लोगों की मांग है कि उन्हें पिछड़े वर्ग की सूची के 2 ए श्रेणी में शामिल किया जाए। इसके अलावा, उन्हें सरकारी नौकरियों और शिक्षा में 15 प्रतिशत आरक्षण  (Reservation) भी मिले।

कर्नाटक में पंचमाली लिंगायत, कुरुबा और वाल्मीकि समुदायों ने आरक्षण की समीक्षा की मांग है। जबकि पंचमाली समुदाय 2 ए श्रेणी की स्थिति की मांग कर रहा है, कुरुबा समुदाय अनुसूचित जनजाति की स्थिति की मांग कर रहा है। वहीं वाल्मीकि समुदाय की एक मांग यह भी है कि अनुसूचित जनजातियों के लिए आरक्षण को तीन से बढ़ाकर 7.5 प्रतिशत किया जाए।

राज्य सरकार पर दबाव

इसको लेकर आरक्षण की मांग करने वाले नेता आज एक ज्ञापन सरकार को देंगे। वहीं राज्य सरकार ने नेताओं को मनाने की कोशिश की है। जबकि विपक्षी दल इस मामले को जारी रखने चाहते हैं। पंचमाली महापीठ के एक प्रभावशाली नेता बसवजय मृत्युंजय स्वामी ने कहा कि वह जब तक कि उनकी मांग पूरी नहीं हो जाती, वह आंदोलन जारी रखेंगे।

राज्य सरकार कर रही है चर्चा

वहीं राज्य के मुख्यमंत्री बीएस येदियुरप्पा ने शुक्रवार को कहा कि राज्य में मौजूदा आरक्षण में संशोधन करने के लिए विभिन्न समुदायों की मांगों के मद्देनजर चर्चा कर रही है। मुख्यमंत्री ने एक सवाल के जवाब में संवाददाताओं से कहा, "मैंने गुरुवार को कैबिनेट की बैठक में इस मामले पर चर्चा की है, सभी मंत्रियों ने अपने विचार व्यक्त किए हैं, आगे बढ़ने के लिए चर्चा चल रही है ... कैसे और क्या करना है।" '

गौरतलब है कि वर्तमान में कर्नाटक में अनुसूचित जातियों के लिए 15 प्रतिशत आरक्षण, एसटी के लिए 3 प्रतिशत और अन्य पिछड़ा वर्ग (ओबीसी) के लिए 32 प्रतिशत आरक्षण है जो बढ़कर 50 प्रतिशत हो जाता है।