कांग्रेस का अविश्वास प्रस्ताव, बहुमत के बाद भी बढ़ी हुई है खट्टर और चौटाला टेंशन

हरियाणा विधानसभा का सत्र 5 मार्च से शुरू हो रहा है। कांग्रेस ने सत्र के पहले दिन सरकार के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव की घोषणा की है।

कांग्रेस का अविश्वास प्रस्ताव, बहुमत के बाद भी बढ़ी हुई है खट्टर और चौटाला टेंशन

नई दिल्ली। कृषि कानूनों के खिलाफ किसानों के आंदोलन के बीच हरियाणा में कांग्रेस ने मुख्यमंत्री मनोहर लाल सरकार की मुश्किलें बढ़ा दी हैं। कांग्रेस ने विधानसभा सत्र के पहले दिन मनोहर लाल सरकार के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव की घोषणा की है। हालांकि, कांग्रेस की इस कोशिश से मनोहर लाल खट्टर से ज्यादा उपमुख्यमंत्री दुष्यंत चौटाला की खींचतान बढ़ रही है। असल में कांग्रेस का मकसद किसान कानून के जरिए जन नायक पार्टी पर अधिक दबाव बढ़ाना है। ताकि वह दबाव में आकर बीजेपी सरकार से समर्थन वापस ले। वहीं कांग्रेस के साथ मिलकर सरकार बनाए।

हरियाणा विधानसभा का सत्र 5 मार्च से शुरू हो रहा है। कांग्रेस ने सत्र के पहले दिन सरकार के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव की घोषणा की है।  सरकार के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव को मंजूरी मिलेगी या नहीं इसका फैसला विधानसभा अध्यक्ष करेंगे। कांग्रेस का कहना है कि अगर अविश्वास प्रस्ताव को मंजूरी दी जाती है, तो जेजेपी को अपना रुख साफ करना होगा। क्योंकि कांग्रेस किसानों के लिए बनाए गए कानून के खिलाफ ही प्रस्ताव ला रही है। कांग्रेस का साफ है कि वह जेजेपी पर दबाव बनाना चाहती है कि वह साफ करे कि पार्टी किसानों का समर्थन करती है या नहीं।

जननायक जनता पार्टी किसानों की राजनीति करती रही है। किसान मतदाताओं ने विधानसभा चुनाव में जेजेपी का समर्थन किया। ऐसे में जेजेपी के लिए अविश्वास प्रस्ताव पर सरकार का समर्थन करना आसान नहीं होगा। क्योंकि, पार्टी के कई विधायकों ने किसानों की मांगों का समर्थन किया, इसलिए पार्टी अध्यक्ष और उपमुख्यमंत्री दुष्यंत चौटाला के लिए पार्टी को एकजुट रखना मुश्किल होगा। 

कांग्रेस शहीद नहीं बनाना चाहती है खट्टर सरकार को

कांग्रेस इस समय मनोहर लाल सरकार को बदलने के पक्ष में नहीं है। लेकिन किसान आंदोलन का फायदा उठाते हुए सरकार को कमजोर करने में कोई कसर नहीं छोड़ना चाहती हैं। वहीं अगर जेजेपी सरकार से समर्थन वापस लेती है, तो सरकार लंबे समय तक नहीं चल पाएगी। ऐसे में नए सिरे से विधानसभा चुनाव होंगे। कांग्रेस भी चुनाव के बाद पूर्ण बहुमत के साथ सत्ता में आना चाहती है। वहीं किसानों आंदोलन का फायदा किसानों को मिल सकता है।