Bureaucracy of Rajasthan: जानें क्यों IAS की तुलना में RAS को क्यों तवज्जों दे रहे हैं गहलोत

Bureaucracy of Rajasthan: राजस्थान की नौकरशाही में (bureaucracy of Rajasthan) में बदलाव देखे जा रहा हैं। वहीं राज्य के सीएम अशोक गहलोत राजस्थान प्रशासनिक सेवाओं के अफसरों को ज्यादा तवज्जो दे रहे हैं ।

Bureaucracy of Rajasthan: जानें क्यों IAS की तुलना में RAS को क्यों तवज्जों दे रहे हैं गहलोत

Bureaucracy of Rajasthan: राजस्थान में गुरुवार को राज्य के सीएम अशोक गहलोत ने प्रशासनिक फेरबदल किया और राज्य प्रशासनिक सेवा (The Rajasthan Administrative Service (RAS) के अफसर भारतीय प्रशासनिक सेवा (Indian Administrative Service) के तुलना में मुख्यमंत्री अशोक गहलोत (Chief Minister Ashok Gehlot) की पहली पसंद बने हैं। राज्य में 33 में से 15 जिलों की कमान प्रमोटी आईएएस अधिकारियों को दी गई है। 

असल में राज्य सरकार ने पूर्वी राजस्थान, अलवर, धौलपुर और सवाई माधोपुर के महत्वपूर्ण जिलों में प्रोमोशनल आईएएस अधिकारियों को कलेक्टर बनाया गया है। चूरू, हनुमानगढ़, चित्तौड़गढ़, उदयपुर, सवाई माधोपुर, कोटा, झुंझुनू, श्रीगंगानगर, बाड़मेर, झालावाड़ और प्रतापगढ़ में भी प्रमोटी IAS अधिकारी तैनात किए गए हैं। मुख्यमंत्री ने राजधानी जयपुर की कमान प्रोमोशनल आईएएस अधिकारी अंतर सिंह नेहरा को भी सौंप दी है। बताया जा रहा है कि राज्य में अगले दो साल में चुनाव होने वाले हैं और ऐसे में राज्य प्रशासनिक सेवा के अफसरों की जिम्मेदारी बढ़ जाती है।


सीएम आरएएस अफसरों की कर चुके हैं तारीफ

राज्य के सीएम अशोक गहलोत सार्वजनिक मंचों पर कई बार राज्य प्रशासनिक सेवा (State Administrative Service officers) के अधिकारियों के कामकाज की प्रशंसा करते रहे हैं। आरएएस (RAS)अधिकारी जनता से सीधे जुड़े होते हैं। राज्य सरकार का मानना ​​है कि आरएएस (RAS) अधिकारी को क्षेत्र की जानकारी सीधे भर्ती अधिकारियों की तुलना में अधिक है। 

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गहलोत सरकार ने आरएएस (RAS) अफसरों को दी ज्यादा ताकत

मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने सत्ता संभालने के 1 साल बाद ही राज्य प्रशासनिक सेवा (RAS) के अधिकारियों की शक्तियों में इजाफा किया और इसके तहत अब एसडीएम अपने उपखंड में एक विभाग का औचक निरीक्षण कर सकता है और लापरवाही बरतने पर संबंधित विभाग के प्रमुख को संबंधित कर्मचारी की दो वेतन वृद्धि रोकने की सिफारिश कर सकता है।