गुजरात निकाय चुनाव में बीजेपी की जय जय, क्या हैं इस जीत के मायने

गुजरात नगरपालिका चुनाव परिणाम(Gujarat Municipal Election Results) नागरिक चुनावों के परिणामों से एक बात स्पष्ट हो गई है कि गुजरात भाजपा का गढ़ है और कोई अन्य पार्टी इस गढ़ में सेंध नहीं लगा सकती है।

गुजरात निकाय चुनाव में बीजेपी की जय जय, क्या हैं इस जीत के मायने

अहमदाबाद। बीजेपी ने गुजरात नगरपालिका (Gujarat Municipal Election Results) चुनाव परिणाम से कांग्रेस से बदला ले लिया है। जिस तरह के कांग्रेस ने पंजाब में निकाय चुनाव में बीजेपी को दौड़ से ही बाहर कर दिया था। कुछ इसी तरह का जवाब बीजेपी ने गुजरात में कांग्रेस को दिया है। वहीं ये बात भी साबित हो गई है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के गृह राज्य में भगवा पार्टी का सिक्का अभी भी चल रहा है। कांग्रेस, असदुद्दीन ओवैसी की AIMIM और आम आदमी पार्टी (AAP) नागरिक चुनावों में बहुत कुछ करने में विफल रही। हालांकि, आप (AAP) ने सूरत में उम्मीद से बेहतर प्रदर्शन करके कांग्रेस की परेशानी को बढ़ा दिया है। अगले साल होने वाले विधानसभा चुनावों के लिए नतीजे भाजपा के लिए बहुत उत्साहजनक होंगे। क्योंकि इन चुनावों को अगले साल होने वाले विधानसभा चुनाव का सेमीफाइनल माना जा रहा था।

अहमदाबाद सहित 6 महानगर पालिकाओं की कुल 576 सीटों पर 21 फरवरी को वोट डाले गए थे। 6 में से 5 महानगर पालिकाओं यानी अहमदाबाद, राजकोट, वडोदरा, जामनगर और भावनगर में भाजपा को बहुमत मिला है। सूरत में आम आदमी पार्टी (AAP) 18 सीटों के साथ दूसरे नंबर की पार्टी बन गई है। इसने कांग्रेस को तीसरे नंबर पर धकेल दिया है।

कांग्रेस को हुआ नुकसान

इस बार सूरत में कांग्रेस को 2015 की तुलना में बड़ी हार मिली है। पाटीदार आरक्षण समिति  ने चुनाव से पहले कांग्रेस का विरोध किया था। जबकि, आम आदमी पार्टी ने एक बड़ी चाल में, पाटीदार उम्मीदवारों को टिकट दिया और उसी क्षेत्र को केंद्र में रखते हुए प्रचार किया। यही कारण था कि आम आदमी पार्टी ने यहां भी कांग्रेस को पछाड़ दिया। पिछले नागरिक चुनावों में, बीजेपी को 80 और 36 सीटें कांग्रेस को मिली थीं।

हार्दिक फैक्टर फ्लॉप

पिछले साल जुलाई में हार्दिक पटेल को गुजरात कांग्रेस कमेटी का कार्यकारी अध्यक्ष बनाया गया था। पाटीदार आरक्षण आंदोलन के लिए जाने जाने वाले हार्दिक ने पूरे गुजरात में नागरिक चुनावों के लिए जमकर प्रचार किया, लेकिन नतीजों से साफ है कि हार्दिक का लोगों ने गर्मजोशी से स्वागत नहीं किया। हालांकि कांग्रेस को उम्मीद थी कि वह हार्दिक पटेल के जरिए खुद को राज्य में फिर से स्थापित कर सकेगी। लेकिन उसका दांव कारगर साबित नहीं हुआ।

आप का बढ़ा कद तो ओवैसी को नकारा

गुजरात नगर निगम चुनाव के नतीजों से साफ है कि आम आदमी पार्टी ने अपना कद बढ़ाया है। ऐसे में यह जीत आम आदमी पार्टी के लिए बड़ी जीत मानी जा रही है। कांग्रेस ने इन चुनावों में पूरी ताकत झोंक दी थी लेकिन वह सफल नहीं हुई। दूसरी ओर गुजरात नागरिक चुनावों में पहली बार असदुद्दीन ओवैसी की पार्टी ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लिमीन ने भी उम्मीदवार उतारे। सबसे पहले, ओवैसी की पार्टी अहमदाबाद में कई सीटों पर आगे चल रही थी, लेकिन फिर सभी उम्मीदवार पीछे हो गए। पार्टी को मुस्लिम बहुल इलाकों में अच्छा प्रदर्शन करने की उम्मीद थी, लेकिन इसका परिणाम नहीं मिला।